मामला 2009 के लोकसभा चुनाव का है। कोड़ा ने झारखंड की चाईबासा सीट से वो इलेक्शन जीता था। इलेक्शन कमीशन को शिकायतें मिली थीं कि कोड़ा ने चुनाव खर्च का सही ब्योरा नहीं दिया। इसके बाद कमीशन ने कोड़ा को नोटिस जारी कर पूछा था कि सही ब्योरा ना देने पर क्यों ना आपको अयोग्य घोषित कर दिया जाए। आयोग के मुताबिक- कोड़ा का खर्च 18 लाख 92 हजार 353 रुपए था, जबकि इन्होंने इसे काफी कम करके बताया था। 49 पेज के ऑर्डर में चुनाव आयाेग ने कहा कि कोड़ा द्वारा जमा करवाया गया ब्योरा गलत था।

झारखंड के पांचवें मुख्यमंत्री के तौर पर कोड़ा ने 2006 में कुर्सी संभाली थी। उस वक्त वह निर्दलीय विधायक थे। पिछले विधानसभा चुनाव में कोड़ा चाईबासा की मंझगांव विधानसभा सीट से चुनाव हार गए थे। कोड़ा झारखंड के पांचवे सीएम थे। वो 14 सितंबर 2006 से 27 अगस्त 2008 तक मुख्यमंत्री रहे। खास बात ये है कि जब वो सीएम बने थे तब वह निर्दलीय विधायक थे। फिलहाल, उनकी पत्नी गीता कोड़ा चाईबासा लोकसभा सीट से कांग्रेस की सांसद हैं।

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा झारखंड विधानसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। चुनाव लड़ने पर रोक के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई जिसके बाद कोर्ट ने कहा कि कोड़ा की अयोग्यता का अभी एक साल और बाकी है। आयोग ने 2009 में चुनावी खर्च के बारे में सही जानकारी नहीं देने पर उन्हें अयोग्य ठहराया था और उनके चुनाव लड़ने पर तीन साल की रोक लगाई गई थी। पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा जगन्नाथपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहते थे।

सितंबर 2017 में आयोग ने तीन साल तक चुनाव लड़ने पर लगाई थी रोक
सितंबर 2017 में चुनाव आयोग ने 2009 के विधानसभा चुनाव में खर्च की सही जानकारी नहीं देने का दोषी पाया था जिसके बाद कोड़ा के चुनाव लड़ने पर तीन साल की रोक

लगाई गई थी। इलेक्शन कमीशन का फैसला आने के बाद कोड़ा ने कहा कि वो इलेक्शन कमीशन के फैसले के खिलाफ कोर्ट जाएंगे।

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