राज्य विद्युत परिषद पर गम्भीर सवाल
लखनऊ। मात्र बीस साल की अल्प अवधि में गैर जिम्मेदारी भरे प्रबंध के रवैये के कारण राज्य विद्युत परिषद का घाटा 77 हजार करोड़ का घाटा आज 87 हजार करोड़ के उपर पहुंच गया है। इस पर उपभोक्ता परिषद ने नैसर्गिक सवाल खड़ा किया है। 1959 में गठित राज्य विद्युत परिषद जिसका कुल घाटा वर्ष 2000 में मात्र 10 हजार करोड़ पहुच जाने पर सरकार ने घाटे का वहन करते हुये राज्य विद्युत परिषद को बीस साल पहले 14 जनवरी को विघटित कर कई कम्पनियों में विभाजित कर दिया गया और बड़े-बड़े दावे किये गये कि अब बिजली कम्पनियों में व्यापक सुधार होगा। बड़े दुर्भाग्य के साथ कहना पड़ रहा है कि सुधार की बात तो दूर वर्तमान में घाटों पर नजर डालें तो उदय मे कम्पनियों ने माना कि अब उनका कुल घाटा लगभग 70738 करोड़ है और वहीं पावर फार आल में माना कि वर्ष 2015-16 तक बिजली कम्पनियों का कुल घाटा लगभग 72770 करोड़ है। वर्तमान में यह 87 हजार करोड़ के ऊपर होगा, इसके लिये कौन जिम्मेदार है?
उपभोक्ता परिषद् ने विघटन के एक महीने बाद ही कहा था बिघटन फेल साबित होगा इसलिए विघटन करने वाले सभी पक्षों से अनुबंध किया जाय और विघटन फेल होने पर उनकी जबाबदेही तय की जाय और उन सबके खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाय अब उसका कौन जबाब देगा ।उपभोक्ता परिषद् सबकी रायसुमारी के लिए उस समय एक हस्ताक्षर अभियान चलाया था जिसमे प्रदेश के अनेको बुद्धजीवीयो की यह राय थे की अनुबंध होना जरूरी ।
उ.प्र.राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेष कुमार वर्मा ने कहा कि वर्तमान में बिजली कम्पनियों के वर्षवार घाटों पर नजर डालें तो बहुत कुछ स्थिति साफ बयां हो रही है कि कम्पनियां बड़े-बड़े दावे भले ही कर लें लेकिन उनका घाटा लगातार बढ़ रहा है और जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता भुगत रही है। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि पिछले वर्षो में बिजली कम्पनियों का घाटा जब सबसे ज्यादा बढ़ा है उस दौरान बिजली दरों में सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है, अतिरिक्त रेगुलेटरी सरचार्ज वसूला गया है। जो यह सिद्ध करता है कि बिजली कम्पनियों की उदासीनता व फिजूलखर्ची के चलते यह विषम परिस्थिति आयी है।

वर्षवार घाटे का ब्यौरा
वर्ष बिजली कम्पनियों का कुल घाटा (करोड़ में)
2000-01=         77 करोड़ (एफआरपी के अनुसार)
2005-06=        5439 करोड़ (एफआरपी के अनुसार)
2007-08 =       13162 करोड़ (एफआरपी के अनुसार)
2009-10 =       20104 करोड़ (एफआरपी के अनुसार)
2010-11=       24025 करोड़ (एफआरपी के अनुसार)
जनवरी 2016 में 70738 करोड़ (उदय अनुबन्ध के अनुसार)
2015-16 72770 करोड़ (पावर फार आल के अनुसार)
वर्तमान में लगभग 87000 करोड़ के ऊपर

 

लखनऊ से प्रेम शर्मा

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