कोरोनावायरस के संदिग्ध मरीजों के नमूने इकट्ठा करने के लिए मोबाइल टेस्टिंग पॉड का इस्तेमाल करने की योजना बनाई है ताकि इसके संक्रमण को फैलने के खतरे को कम किया जा सकता है

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कोरोनावायरस के संदिग्ध मरीजों
  • पंजाब के संगरूर जिला प्रशासन ने कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों के नमूने इकट्ठे करने के लिए ‘मोबाइल टेस्टिंग पॉड का इस्तेमाल करने की योजना बनाई है ताकि इसके संक्रमण को फैलने के खतरे को कम किया जा सके। संगरूर के उपायुक्त घनश्याम ठोरी ने बताया कि यह उन स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया गया है जो कोविड-19 के संदिग्ध मरीजों के नमूने इकट्ठे करते हैं क्या है टेस्टिंग पॉड

दरअसल टेस्टिंग पॉड एक पॉलीकार्बोनेट ग्लास की शीट होती है जिसके पीछे से डॉक्टर खड़ा होकर स्वैब लेता है। डॉक्टर सिर्फ पॉड के अंदर से हाथ बाहर निकालता है। ऐसा भी कहा जा रहा है कि इससे सैंपल क्लेक्शन के लिए जरूरी पीपीई की मांग में भी कमी आएगी। इस पॉड को आप वाहन पर लगाकर आसानी से कहीं भी ले जा सकते है।

ठोरी ने बताया कि इस ‘टेस्टिंग पॉड में विश्व की सर्वश्रेष्ठ प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। इनमें प्लास्टिक के दस्तानों की जगह ‘डिस्पोज़ल दस्तानों का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि हर बार नमूने लेने के बाद उसका निपटान किया जा सके। ठोरी ने बताया कि ‘पॉड को एक वाहन पर लगाया जाएगा ताकि नमूने लेने के लिए उसे कहीं भी ले जाया जा सके।
उन्होंने बताया कि एक ‘पॉड पर करीब 25 से 30 हजार रूपये का खर्च आता है, जिसे सरकारी अस्पतालों और जिले में अन्य आवश्यक स्थानों पर स्थापित किया जाएगा। उपायुक्त ने बताया कि ‘पॉड के इस्तेमाल से पीपीई किट, दस्तानों, मास्क आदि की मांग में कमी आएगी। साथ ही उन्होंने बताया कि ‘पॉड से नमूने लेने की प्रकिया पारम्परिक तरीके की तुलना में आसान हो जाएगी।

पंजाब के संगरूर जिला प्रशासन ने कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों के नमूने इकट्ठे करने के लिए ‘मोबाइल टेस्टिंग पॉड का इस्तेमाल करने की योजना बनाई है ताकि इसके संक्रमण को फैलने के खतरे को कम किया जा सके। संगरूर के उपायुक्त घनश्याम ठोरी ने बताया कि यह उन स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया गया है जो कोविड-19 के संदिग्ध मरीजों के नमूने इकट्ठे करते हैं।
क्या है टेस्टिंग पॉड दरअसल टेस्टिंग पॉड एक पॉलीकार्बोनेट ग्लास की शीट होती है जिसके पीछे से डॉक्टर खड़ा होकर स्वैब लेता है। डॉक्टर सिर्फ पॉड के अंदर से हाथ बाहर निकालता है। ऐसा भी कहा जा रहा है कि इससे सैंपल क्लेक्शन के लिए जरूरी पीपीई की मांग में भी कमी आएगी। इस पॉड को आप वाहन पर लगाकर आसानी से कहीं भी ले जा सकते है। ठोरी ने बताया कि इस ‘टेस्टिंग पॉड में विश्व की सर्वश्रेष्ठ प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। इनमें प्लास्टिक के दस्तानों की जगह ‘डिस्पोज़ल दस्तानों का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि हर बार नमूने लेने के बाद उसका निपटान किया जा सके। ठोरी ने बताया कि ‘पॉड को एक वाहन पर लगाया जाएगा ताकि नमूने लेने के लिए उसे कहीं भी ले जाया जा सके। उन्होंने बताया कि एक ‘पॉड पर करीब 25 से 30 हजार रूपये का खर्च आता है, जिसे सरकारी अस्पतालों और जिले में अन्य आवश्यक स्थानों पर स्थापित किया जाएगा। उपायुक्त ने बताया कि ‘पॉड के इस्तेमाल से पीपीई किट, दस्तानों, मास्क आदि की मांग में कमी आएगी। साथ ही उन्होंने बताया कि ‘पॉड से नमूने लेने की प्रकिया पारम्परिक तरीके की तुलना में आसान हो जाएगी।

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