हैरी पॉटर फिल्म सीरीज़ के बाद बढ़ गया था भारत में उल्लुओं का कालाबाज़ार तेजस्विता उपाध्यया।

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हैरी पॉटर फिल्म सीरीज़ के बाद बढ़
  • उल्लु एक ऐसा पंछी है जो अक्सर रात के अंधेरों में दिखायी देता है क्योकिं वो दिन में नही देख सकता और यही उसके प्रसिद्ध होने का कारण भी है। उल्लु की आँख बड़ी होती है जिसे उसके बुद्धिमान होने का निशानी भी माना जाता है पर मजेदार बात यह है की किसी मंदबुद्धि को भारत में उल्लु कहकर संबोधित किया जाता है। उल्लु अपनी गर्दन को 270 डिग्री तक घुमा सकता है पर अपनी आंखों को नहीं हिला सकता और साथ ही यह जान ले कि उल्लु के आंखों पर तीन परत होती है पहला आँख साफ़ करने के लिए दुसरा सोने के लिये और तीसरा पलक झपकाने के लिए। प्रकृति भी कमाल की रचयिता है।

उल्लुओं की सबसे ज्यादा प्रजाति एशिया महाद्वीप में पायी जाती है पर लोगो के शौक के कारण अब ये निराला पंछी भी विलुप्त होता जा रहा है। उल्लुओं के शरीर के प्रत्येक अंग की बाजार में अलग अलग विशेषता है और उसी प्रकार इनके दाम भी तय है। इसी कार्य के रोकथाम के लिये जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत उल्लुओं को पालना या उनका मांस,पंख अथवा किसी भी चीज़ की बाज़ारी करना कानूनन अपराध माना गया है जिसके उल्लंघन करने पर आरोपी को 3 साल की कैद या 1 लाख़ रुपये जुर्माना अदा करना पड़ सकता है या फिर दोनों। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य वन्य जीवों के अवैध शिकार, उनकी खाल/माँस के व्यापार को रोकना है। इसके बावजुद भी हैरी पॉटर फिल्म सीरीज़ के लोकप्रियता के बाद युवकों में उल्लुओं को पालने का अलग ही सनक चढ़ गया जिसे वो गैरकानूनी तरीके से पुरा करने लगे सरकार से छुप कर उल्लुओं का कालाबाज़ार शुरू हो गया लेकिन उल्लुओं को सुलभ पर्यावरण एवं उनके पालन मे लापरवाही के कारण उल्लुओं की भारी मात्रा में मृत्यु होने लगी और पालतु होने के कारण यानी अकेले पिंजरे में बंद होने के कारण और अधिक उल्लुओं का प्रजनन ना हो सकता था जिससे इनके मात्रा में काफी गिरावट हुयी । वैसे सिर्फ़ हैरी पॉटर का सनक ही नहीं बल्कि भारत में फैले अन्धविश्वासों के कारण भी उल्लुओं का दर्शन आज दुर्लभ है। ऐसी मान्यता है कि अमावस की रात तांत्रिक पुजा का अनुष्ठान कर उल्लु की बली देने से व्यक्ति रातों रात अमीर हो जाता है। काली पुजा के दिन उल्लुओं की बली देने की परम्परा कई साल से चली आ रही है जिसके लिये लोग मुँहमांगी दाम पर उल्लुओं की खरीद करते हैं। उल्लुओं की सबसे अधिक खरीद और बिक्री उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में होती है जहाँ इनके दाम 20,000 से 50,000 तक होते है।
उल्लु एक शिकारी पंछी है जो पर्यावरण को साफ रखने में मददगार होते हैं। हम सभी को मिलकर इनको संरक्षित करना चाहिये ना की ऐसे अफ़वाहो का शिकार बनना चाहिए। अगर आपको कोई व्यक्ति उल्लुओं का व्यापार करता दिखे तो तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दे पर ध्यान रहे की आप उनका सामना खुद ना करें क्योंकि ये आपके लिये घातक साबित हो सकता है। ज़रा सोचिए अगर उल्लुओं की बलि देने से इंशान सच में अमीर हो जाता तो अबतक तो उनका व्यापार करने वाले खुद करोड़पति ना बन गये होते ।

  • हैरी पॉटर फिल्म सीरीज़ के बाद बढ़ गया था भारत में उल्लुओं का कालाबाज़ार
  • तेजस्विता उपाध्यया।।

उल्लु एक ऐसा पंछी है जो अक्सर रात के अंधेरों में दिखायी देता है क्योकिं वो दिन में नही देख सकता और यही उसके प्रसिद्ध होने का कारण भी है। उल्लु की आँख बड़ी होती है जिसे उसके बुद्धिमान होने का निशानी भी माना जाता है पर मजेदार बात यह है की किसी मंदबुद्धि को भारत में उल्लु कहकर संबोधित किया जाता है। उल्लु अपनी गर्दन को 270 डिग्री तक घुमा सकता है पर अपनी आंखों को नहीं हिला सकता और साथ ही यह जान ले कि उल्लु के आंखों पर तीन परत होती है पहला आँख साफ़ करने के लिए दुसरा सोने के लिये और तीसरा पलक झपकाने के लिए। प्रकृति भी कमाल की रचयिता है।
उल्लुओं की सबसे ज्यादा प्रजाति एशिया महाद्वीप में पायी जाती है पर लोगो के शौक के कारण अब ये निराला पंछी भी विलुप्त होता जा रहा है। उल्लुओं के शरीर के प्रत्येक अंग की बाजार में अलग अलग विशेषता है और उसी प्रकार इनके दाम भी तय है। इसी कार्य के रोकथाम के लिये जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत उल्लुओं को पालना या उनका मांस,पंख अथवा किसी भी चीज़ की बाज़ारी करना कानूनन अपराध माना गया है जिसके उल्लंघन करने पर आरोपी को 3 साल की कैद या 1 लाख़ रुपये जुर्माना अदा करना पड़ सकता है या फिर दोनों। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य वन्य जीवों के अवैध शिकार, उनकी खाल/माँस के व्यापार को रोकना है। इसके बावजुद भी हैरी पॉटर फिल्म सीरीज़ के लोकप्रियता के बाद युवकों में उल्लुओं को पालने का अलग ही सनक चढ़ गया जिसे वो गैरकानूनी तरीके से पुरा करने लगे सरकार से छुप कर उल्लुओं का कालाबाज़ार शुरू हो गया लेकिन उल्लुओं को सुलभ पर्यावरण एवं उनके पालन मे लापरवाही के कारण उल्लुओं की भारी मात्रा में मृत्यु होने लगी और पालतु होने के कारण यानी अकेले पिंजरे में बंद होने के कारण और अधिक उल्लुओं का प्रजनन ना हो सकता था जिससे इनके मात्रा में काफी गिरावट हुयी । वैसे सिर्फ़ हैरी पॉटर का सनक ही नहीं बल्कि भारत में फैले अन्धविश्वासों के कारण भी उल्लुओं का दर्शन आज दुर्लभ है। ऐसी मान्यता है कि अमावस की रात तांत्रिक पुजा का अनुष्ठान कर उल्लु की बली देने से व्यक्ति रातों रात अमीर हो जाता है। काली पुजा के दिन उल्लुओं की बली देने की परम्परा कई साल से चली आ रही है जिसके लिये लोग मुँहमांगी दाम पर उल्लुओं की खरीद करते हैं। उल्लुओं की सबसे अधिक खरीद और बिक्री उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में होती है जहाँ इनके दाम 20,000 से 50,000 तक होते है।
उल्लु एक शिकारी पंछी है जो पर्यावरण को साफ रखने में मददगार होते हैं। हम सभी को मिलकर इनको संरक्षित करना चाहिये ना की ऐसे अफ़वाहो का शिकार बनना चाहिए। अगर आपको कोई व्यक्ति उल्लुओं का व्यापार करता दिखे तो तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दे पर ध्यान रहे की आप उनका सामना खुद ना करें क्योंकि ये आपके लिये घातक साबित हो सकता है। ज़रा सोचिए अगर उल्लुओं की बलि देने से इंशान सच में अमीर हो जाता तो अबतक तो उनका व्यापार करने वाले खुद करोड़पति ना बन गये होते ।