छात्र लगा रहे हैं गुहार लाॅकडाउन तक कमरों का किराया हो माफ़ तेजस्विता उपाध्याय,

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छात्र लगा रहे हैं गुहार लाॅकडाउन तक
  • मऊ।।कोरोनवायरस से लड़ने के लिए पुरा भारतवर्ष लॉकडाउन के चलते अपने अपने घरों में कैद है और कई ऐसे है जो अपने शहर लॉकडाउन लागू होने तक नहीं पहुँच सके। भारत के प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए लोगों से अनुरोध किया कि जो जहाँ है वहीं रहें उन्हें किसी भी प्रकार की समस्या भारत सरकार नहीं होने देगी। सभी राज्य की सरकारों ने हर वर्ग की बात सुनी और सहायता की पर खाली कमरों के किराया माफ़ी को लेकर छात्रों का आक्रोश और अनुरोध सरकार से अबतक अनछुआ है।

लॉकडाउन की अवधि अब कुल 40 दिन तक हो गयी है। सभी अपने व्यापार और दुकान बंद कर घर में बैठें हैं और देश को महामारी से बचाने के लिए अपना योगदान दे रहे हैं। जिन जिन राज्यों में गरीब अपने राशन पानी का इन्तज़ाम नही कर पाये समय समय पर सरकार द्वारा जारी निर्देशों को ध्यान में रखते हुए लोगों को गरीबों की साहयता करते पाया जा रहा है। पर अपने घरों में सुरक्षित रह रहे छात्र अपनी नाराज़गी अलग अलग सोशल साइट्स पर दिखा रहें हैं बता दें की ये वो छात्र वर्ग है जो अपने घर से दूर किसी हॉस्टल या किराए के मकान में रहकर अपनी शिक्षा ले रहे है और भारतबंद के चलते ये अपने घर पर करीब एक महीने से है और इनकी नाराज़गी का कारण है मकान मालिकों द्वारा इनके खाली कमरे का किराया माँगना। अपनी आवाज़ लोगों तक पहूंचाने के लिए “नो रेंट फ़ॉर स्टूडेंट्स” अभियान ट्विटर पर छात्रों द्वारा चलाया जा रहा है पर इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा। इस विषय पर अपने घर से दूर पढ़ाई कर रहे छात्रों ने अपने अपने विचार दिये हैं।
• चंदन कुमार (मूल निवासी पटना वर्तमान में दिल्ली से मास कम्युनिकेसन कर रहे हैं) — मेरे परिवार की आमदनी और समय के हिसाब से काफी कम हो गयी है ऐसे में मकानमालिकों द्वारा खाली कमरों का किराया मागना हमे गवारा नहीं। जब कोई बिजली पानी हम खर्च ही नही कर रहे उसके बावजूद भी पुरा किराया लेना सही नही है। सरकार से अनुरोध है कि वो हमारी अवाज सुने और हमारी मदद करें।
•मुस्कान मित्तल(हरियाणा की मूल निवासी जो अभी दिल्ली में रहकर बिज़नेस ऐडमिनिस्ट्रेशन का कोर्स कर रहीं हैं)– ये बेहद मुश्किल दौर है। वही खाली रुम का किराया इस समय देना जब घर में खुद पैसे की मुश्किले है यह एक प्रकार से हमारे अभिभावकों पर बोझ है। मकान मालिक को भी हमारी पारिस्थिति को समझना चाहिए और मुश्कील समय में दोनो पक्ष के हित की बात करनी चाहिये। यही इंसानियत है।
• शिवम वर्मा(मूल निवासी गोरखपुर, प्रयागराज में नेवी की तैयारी कर रहे हैं) युवा शक्ति देश और समाज की रीढ़ होती है। युवा देश और समाज को नए शिखर पर ले जाते हैं। पर जब युवाओं पर आपत्ति आयी है तो अभी तक कोई जाना-माना चेहरा उनकी बात पर ध्यान नही दे रहा है। युवा देश और समाज के जीवन मूल्यों के प्रतीक हैं पर जब वो खुद गिरने लगे तो उनकी बात सुनकर समाधान निकालना देश के सेवकों का कर्तव्य है।
जहाँ छात्र अपने परिवार के बंद कमाई को अपना किराया नहीं भर पाने का कारण बता रहे हैं वही मकानमालिक किराये को इस लॉकडाउन में कमाने का एकमात्र साधन कह कर किराया नही माफ़ करने की चिंता जता रहे हैं।यह आवश्यकता है की प्रत्यके राज्य दोनो दलों की परिस्थितियों पर विचार कर मध्य का मार्ग प्रशस्त करे।

छात्र लगा रहे हैं गुहार लाॅकडाउन तक कमरों का किराया हो माफ़

तेजस्विता उपाध्याय

,मऊ।।कोरोनवायरस से लड़ने के लिए पुरा भारतवर्ष लॉकडाउन के चलते अपने अपने घरों में कैद है और कई ऐसे है जो अपने शहर लॉकडाउन लागू होने तक नहीं पहुँच सके। भारत के प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए लोगों से अनुरोध किया कि जो जहाँ है वहीं रहें उन्हें किसी भी प्रकार की समस्या भारत सरकार नहीं होने देगी। सभी राज्य की सरकारों ने हर वर्ग की बात सुनी और सहायता की पर खाली कमरों के किराया माफ़ी को लेकर छात्रों का आक्रोश और अनुरोध सरकार से अबतक अनछुआ है।

लॉकडाउन की अवधि अब कुल 40 दिन तक हो गयी है। सभी अपने व्यापार और दुकान बंद कर घर में बैठें हैं और देश को महामारी से बचाने के लिए अपना योगदान दे रहे हैं। जिन जिन राज्यों में गरीब अपने राशन पानी का इन्तज़ाम नही कर पाये समय समय पर सरकार द्वारा जारी निर्देशों को ध्यान में रखते हुए लोगों को गरीबों की साहयता करते पाया जा रहा है। पर अपने घरों में सुरक्षित रह रहे छात्र अपनी नाराज़गी अलग अलग सोशल साइट्स पर दिखा रहें हैं बता दें की ये वो छात्र वर्ग है जो अपने घर से दूर किसी हॉस्टल या किराए के मकान में रहकर अपनी शिक्षा ले रहे है और भारतबंद के चलते ये अपने घर पर करीब एक महीने से है और इनकी नाराज़गी का कारण है मकान मालिकों द्वारा इनके खाली कमरे का किराया माँगना। अपनी आवाज़ लोगों तक पहूंचाने के लिए “नो रेंट फ़ॉर स्टूडेंट्स” अभियान ट्विटर पर छात्रों द्वारा चलाया जा रहा है पर इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा। इस विषय पर अपने घर से दूर पढ़ाई कर रहे छात्रों ने अपने अपने विचार दिये हैं।
• चंदन कुमार (मूल निवासी पटना वर्तमान में दिल्ली से मास कम्युनिकेसन कर रहे हैं) — मेरे परिवार की आमदनी और समय के हिसाब से काफी कम हो गयी है ऐसे में मकानमालिकों द्वारा खाली कमरों का किराया मागना हमे गवारा नहीं। जब कोई बिजली पानी हम खर्च ही नही कर रहे उसके बावजूद भी पुरा किराया लेना सही नही है। सरकार से अनुरोध है कि वो हमारी अवाज सुने और हमारी मदद करें।
•मुस्कान मित्तल(हरियाणा की मूल निवासी जो अभी दिल्ली में रहकर बिज़नेस ऐडमिनिस्ट्रेशन का कोर्स कर रहीं हैं)– ये बेहद मुश्किल दौर है। वही खाली रुम का किराया इस समय देना जब घर में खुद पैसे की मुश्किले है यह एक प्रकार से हमारे अभिभावकों पर बोझ है। मकान मालिक को भी हमारी पारिस्थिति को समझना चाहिए और मुश्कील समय में दोनो पक्ष के हित की बात करनी चाहिये। यही इंसानियत है।
• शिवम वर्मा(मूल निवासी गोरखपुर, प्रयागराज में नेवी की तैयारी कर रहे हैं) युवा शक्ति देश और समाज की रीढ़ होती है। युवा देश और समाज को नए शिखर पर ले जाते हैं। पर जब युवाओं पर आपत्ति आयी है तो अभी तक कोई जाना-माना चेहरा उनकी बात पर ध्यान नही दे रहा है। युवा देश और समाज के जीवन मूल्यों के प्रतीक हैं पर जब वो खुद गिरने लगे तो उनकी बात सुनकर समाधान निकालना देश के सेवकों का कर्तव्य है।
जहाँ छात्र अपने परिवार के बंद कमाई को अपना किराया नहीं भर पाने का कारण बता रहे हैं वही मकानमालिक किराये को इस लॉकडाउन में कमाने का एकमात्र साधन कह कर किराया नही माफ़ करने की चिंता जता रहे हैं।यह आवश्यकता है की प्रत्यके राज्य दोनो दलों की परिस्थितियों पर विचार कर मध्य का मार्ग प्रशस्त करे।

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