लॉक डाउन ने लघु उद्यमियों की तोड़ी कमर डॉ विक्रम लघु उद्योगों की स्थिति हुई बेहद दयनीय

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लॉक डाउन ने लघु उद्यमियों की तोड़ी
  • नालागढ़ हिमाचल  प्रिंटर्स एसोसिएशन  के प्रदेश अध्यक्ष डॉ विक्रम जिंदल ने कहा कि लॉक डॉन की वजह से सूक्ष्म मध्यम व लघु उद्योग बहुत ही दयनीय स्थिति में आ गया है। पहले ही तीन साल से मंदी से जूझ रहे इन उद्योगों की लॉक डाउन ने कमर तोड़ कर रख दी है। जिसकी वजह से उद्योगपतियों व उनमें कार्यरत कर्मचारियों के भविष्य पर तलवार लटक गई है।

उद्योगों को पुनर्जीवित करने के लिए केंद्र व राज्य सरकार से उद्योगपतियों की समस्याओं पर ध्यान देने व उन्हें निराकरण करने की उम्मीद हैं। डॉ जिंदल ने कहा कि प्रिंटिंग कारोबार से जुड़े लोगों को बाजार में कच्चा माल नहीं मिल रहा है। अधिकांश पेपर मिल बंद पड़े हैं। जब तक पेपर मिल नहीं चलेगी, तब तक प्रिंटिंग उद्योग कच्चे माल की समस्या से जूझते रहेंगे। प्रिंटिंग उद्योगों को केमिकल व अन्य सामान सप्लाई करने वाले व्यवसायियों को अभी तक काम करने की अनुमति नहीं है। जिसकी वजह से उद्योग चलाना नामुमकिन हो गया है। डॉ जिंदल ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि लॉक डाउन पीरियड के दौरान कर्मचारियों को जो तनखा बनते हैं वह ईएसएस के माध्यम से दी जाए। उद्योगों की आर्थिक स्थिति पहले से काफी कमजोर हो गई है। औद्योगिक क्षेत्र में कर्मचारियों के आने जाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवा शुरू की जानी चाहिए। उद्योगों के लिए सरकार को आर्थिक पैकेज की घोषणा करनी चाहिए। उद्योगों पर लगने वाली इलेक्ट्रिसिटी चार्जेस तीन महीने के लिए वापस ली जाए। उद्योग चलाने पर जिन उद्योगों को नई मशीनरी इसकी जरूरत हो उस पर 50 फ़ीसदी कैपिटल सब्सिडी दी जाए। उद्योगों पर लगने वाले सभी टैक्स फीस बिना ब्याज के तीन महीने तक एक्सटेंड किया जाए। जो कर्मचारी उद्योगों में जानबूझकर नहीं आ रहे हैं उनकी तनख्वाह देने के लिए उद्योगपतियों को बाध्य ना किया जाए।

लॉक डाउन ने लघु उद्यमियों की तोड़ी कमर-   डॉ विक्रम
लघु उद्योगों की स्थिति हुई बेहद दयनीय:
नालागढ़
हिमाचल  प्रिंटर्स एसोसिएशन  के प्रदेश अध्यक्ष डॉ विक्रम जिंदल ने कहा कि लॉक डॉन की वजह से सूक्ष्म मध्यम व लघु उद्योग बहुत ही दयनीय स्थिति में आ गया है। पहले ही तीन साल से मंदी से जूझ रहे इन उद्योगों की लॉक डाउन ने कमर तोड़ कर रख दी है। जिसकी वजह से उद्योगपतियों व उनमें कार्यरत कर्मचारियों के भविष्य पर तलवार लटक गई है। उद्योगों को पुनर्जीवित करने के लिए केंद्र व राज्य सरकार से उद्योगपतियों की समस्याओं पर ध्यान देने व उन्हें निराकरण करने की उम्मीद हैं। डॉ जिंदल ने कहा कि प्रिंटिंग कारोबार से जुड़े लोगों को बाजार में कच्चा माल नहीं मिल रहा है। अधिकांश पेपर मिल बंद पड़े हैं। जब तक पेपर मिल नहीं चलेगी, तब तक प्रिंटिंग उद्योग कच्चे माल की समस्या से जूझते रहेंगे। प्रिंटिंग उद्योगों को केमिकल व अन्य सामान सप्लाई करने वाले व्यवसायियों को अभी तक काम करने की अनुमति नहीं है। जिसकी वजह से उद्योग चलाना नामुमकिन हो गया है। डॉ जिंदल ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि लॉक डाउन पीरियड के दौरान कर्मचारियों को जो तनखा बनते हैं वह ईएसएस के माध्यम से दी जाए। उद्योगों की आर्थिक स्थिति पहले से काफी कमजोर हो गई है। औद्योगिक क्षेत्र में कर्मचारियों के आने जाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवा शुरू की जानी चाहिए। उद्योगों के लिए सरकार को आर्थिक पैकेज की घोषणा करनी चाहिए। उद्योगों पर लगने वाली इलेक्ट्रिसिटी चार्जेस तीन महीने के लिए वापस ली जाए। उद्योग चलाने पर जिन उद्योगों को नई मशीनरी इसकी जरूरत हो उस पर 50 फ़ीसदी कैपिटल सब्सिडी दी जाए। उद्योगों पर लगने वाले सभी टैक्स फीस बिना ब्याज के तीन महीने तक एक्सटेंड किया जाए। जो कर्मचारी उद्योगों में जानबूझकर नहीं आ रहे हैं उनकी तनख्वाह देने के लिए उद्योगपतियों को बाध्य ना किया जाए।

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