नालागढ़: प्रदेश के फार्मा उद्योग पहले से कोरोना की मार से परेशान है। फार्मा कंपनी हेतू रॉ मैटेरियल आना शुरू हो गया हुआ है परंतु बड़ी-बड़ी मेट्रोपोलिटन सिटी में बैठे कुछ ट्रेडर्स और

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नालागढ़ प्रदेश के फार्मा उद्योग
  • मैन्यूफैक्चर द्वारा रॉं मेटीरियल के तीन गुणा दाम बढ़ाए जाने से उनका
  • धंधा तो शुरू हो गया है जिसके परिणाम स्वरूप देश में दवाइयां बनाने वाली
  • फार्मा कंपनियों के ऊपर सीधा असर पड़ा है। पहले ट्रेडर्स 90 दिन का उधार
  • देकर रा मटीरियल उपलब्ध हो जाता था परन्तु अब एडवांस पेमेंट की डिमांड की
  • जा रही है जो तर्कसंगत नही है।हिमाचल प्रदेश के मिनी भारत कहे जाने वाले
  • फार्मा हब बददी के करीब दर्जनों फार्मा उधमियों

ने इस बाबत प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन वह प्रदेश की सरकारों
से आग्रह किया है कि रॉं मटीरियल के तीन गुना दाम बढ़ाने वाले कुछ
मैन्यूफैक्चर ट्रेडर्स पर निगरानी कर उन पर लगाम लगाई जाए ताकि देश में
करीब 25 फीसदी मौजूद समय में चलने वाले फार्मा उद्योग जो चल रहे हैं वह
महामारी और देश में बीमारियों के दौरान प्रयोग होने वाली दवाइयों की
आपूर्ति उपलब्ध करवा सकें । क्युरटेक समूह के एमडी सुमित सिंगला ने इस
बाबत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को भेजी चिठी की प्रतियां
दिखाते हुए कहा कि दवा उद्योग में प्रयोग होने वाली एसिक्लोफिनेक जिसके
दाम एक हजार रुपये थे वे 1250 तक पहुंच गए हैं,पेरासिटामोल 250 रुपये से
अब 430 रुपये,अज़ीथ्रोमैसी न जिसकी कीमत पहले 7000 से अब 15000 पहुंच गई
है,अमोक्सि 1400 से 1950 हो गई है, क्लाइब पहले 8000 अब 25000,
ओरेन्डाजोल पहले 700 अब 1350, ऑफलोकासिन पहले 2200 अब 3450,
हैड्रोक्सओक्लोराक्विने पहले 8000 अब 70000 तक अब दाम बढ़ा दिए हैं ।
उन्होंने जल्द से जल्द राहत की मांग उठाते हुए इस महंगाई को कम करने की
मांग उठाई है।

नालागढ़: प्रदेश के फार्मा उद्योग पहले से कोरोना की मार से परेशान है।
फार्मा कंपनी हेतू रॉ मैटेरियल आना शुरू हो गया हुआ है
परंतु बड़ी-बड़ी मेट्रोपोलिटन सिटी में बैठे कुछ ट्रेडर्स और
मैन्यूफैक्चर द्वारा रॉं मेटीरियल के तीन गुणा दाम बढ़ाए जाने से उनका
धंधा तो शुरू हो गया है जिसके परिणाम स्वरूप देश में दवाइयां बनाने वाली
फार्मा कंपनियों के ऊपर सीधा असर पड़ा है। पहले ट्रेडर्स 90 दिन का उधार
देकर रा मटीरियल उपलब्ध हो जाता था परन्तु अब एडवांस पेमेंट की डिमांड की
जा रही है जो तर्कसंगत नही है।हिमाचल प्रदेश के मिनी भारत कहे जाने वाले
फार्मा हब बददी के करीब दर्जनों फार्मा उधमियों ने इस बाबत प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन वह प्रदेश की सरकारों
से आग्रह किया है कि रॉं मटीरियल के तीन गुना दाम बढ़ाने वाले कुछ
मैन्यूफैक्चर ट्रेडर्स पर निगरानी कर उन पर लगाम लगाई जाए ताकि देश में
करीब 25 फीसदी मौजूद समय में चलने वाले फार्मा उद्योग जो चल रहे हैं वह
महामारी और देश में बीमारियों के दौरान प्रयोग होने वाली दवाइयों की
आपूर्ति उपलब्ध करवा सकें । क्युरटेक समूह के एमडी सुमित सिंगला ने इस
बाबत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को भेजी चिठी की प्रतियां
दिखाते हुए कहा कि दवा उद्योग में प्रयोग होने वाली एसिक्लोफिनेक जिसके
दाम एक हजार रुपये थे वे 1250 तक पहुंच गए हैं,पेरासिटामोल 250 रुपये से
अब 430 रुपये,अज़ीथ्रोमैसी न जिसकी कीमत पहले 7000 से अब 15000 पहुंच गई
है,अमोक्सि 1400 से 1950 हो गई है, क्लाइब पहले 8000 अब 25000,
ओरेन्डाजोल पहले 700 अब 1350, ऑफलोकासिन पहले 2200 अब 3450,
हैड्रोक्सओक्लोराक्विने पहले 8000 अब 70000 तक अब दाम बढ़ा दिए हैं ।
उन्होंने जल्द से जल्द राहत की मांग उठाते हुए इस महंगाई को कम करने की
मांग उठाई है।

Nalagarh se Anwar Hussain

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