कर्ज बाटने के बजाए बैंक आरबीआई में मोटी रकम जमा कर रहे है

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कर्ज बाटने के बजाए बैंक आरबीआई
  • तेजस्विता उपाध्याय, मऊ:- लॉकडाउन के कारण आरबीआई ने दिशा निर्देश जारी कर आसानी से लोगों को कर्ज देनी की हिदायत देने के बावजूद बैंकों को अपने पास पड़ी अतिरिक्त 8.5 लाख करोड़ रुपए की नकदी आरबीआई को देना ज्यादा फ़ायदा का सौदा नज़र आ रहा है। जिसके कारण केन्द्रीय बैंक की चुनौतियां बढ़ गई है। यह एक भारी परेशानी का सबब अर्थव्यवस्था के लिए बं सकता है।

आंकड़ों के अनुसार बैंकों ने पिछले दिनों आरबीआई के पास आरबीआई के पास 8.5 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त नगदी जमा कि। विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक पिछले कुछ समय से सात लाख करोड़ रुपए से अधिक नकदी आरबीआई के पास जमा करते आए है। लेकिन हाल ही के आंकड़ों के अनुसार पूरी वित्तीय व्यवस्था के लिए परेशानी का सबब बन सकते है। अगर विशेषज्ञों कि माने तो आरबीआई कि बैंकों से नकदी लेने के लिए उन्हें बॉन्ड जारी करना होता है। बैंकों की नकदी रखने के लिए आरबीआई का रिवर्स रेपो रेट के आधार पर ब्याज चुकाना होता है। आरबीआई के अनुसार फिलहाल रिवर्स रेपो रेट 3.7 फ़ीसदी है।
विशेषज्ञों की माने तो उनका कहना है कि बैंक अपनी नकदी का इस्तेमाल कर्ज देने के लिए करते है तो उससे बैंकों के साथ अर्थव्यवस्था को भी लाभ अधिक मात्रा में होता है। कोरोना महामारी के इस कालि काल में आरबीआई ने बैंकों को अतिरिक्त 50 हज़ार करोड़ रुपयों की नकदी उपलब्ध कराई थी। जिससे कर्ज बाटने में परेशानी नहीं हो सके। लेकिन बैंक आम लोगों और कारोबारियों को कर्ज देने की बजाय सरकारी बॉन्ड में निवेश को ज्यादा फायदेमंद मान रहे है।

कर्ज बाटने के बजाए बैंक आरबीआई में मोटी रकम जमा कर रहे है

तेजस्विता उपाध्याय, मऊ:- लॉकडाउन के कारण आरबीआई ने दिशा निर्देश जारी कर आसानी से लोगों को कर्ज देनी की हिदायत देने के बावजूद बैंकों को अपने पास पड़ी अतिरिक्त 8.5 लाख करोड़ रुपए की नकदी आरबीआई को देना ज्यादा फ़ायदा का सौदा नज़र आ रहा है। जिसके कारण केन्द्रीय बैंक की चुनौतियां बढ़ गई है। यह एक भारी परेशानी का सबब अर्थव्यवस्था के लिए बं सकता है। आंकड़ों के अनुसार बैंकों ने पिछले दिनों आरबीआई के पास आरबीआई के पास 8.5 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त नगदी जमा कि। विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक पिछले कुछ समय से सात लाख करोड़ रुपए से अधिक नकदी आरबीआई के पास जमा करते आए है। लेकिन हाल ही के आंकड़ों के अनुसार पूरी वित्तीय व्यवस्था के लिए परेशानी का सबब बन सकते है। अगर विशेषज्ञों कि माने तो आरबीआई कि बैंकों से नकदी लेने के लिए उन्हें बॉन्ड जारी करना होता है। बैंकों की नकदी रखने के लिए आरबीआई का रिवर्स रेपो रेट के आधार पर ब्याज चुकाना होता है। आरबीआई के अनुसार फिलहाल रिवर्स रेपो रेट 3.7 फ़ीसदी है।
विशेषज्ञों की माने तो उनका कहना है कि बैंक अपनी नकदी का इस्तेमाल कर्ज देने के लिए करते है तो उससे बैंकों के साथ अर्थव्यवस्था को भी लाभ अधिक मात्रा में होता है। कोरोना महामारी के इस कालि काल में आरबीआई ने बैंकों को अतिरिक्त 50 हज़ार करोड़ रुपयों की नकदी उपलब्ध कराई थी। जिससे कर्ज बाटने में परेशानी नहीं हो सके। लेकिन बैंक आम लोगों और कारोबारियों को कर्ज देने की बजाय सरकारी बॉन्ड में निवेश को ज्यादा फायदेमंद मान रहे है।

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