परिवार की चिन्ता में मुम्बई से घर पैदल चले आये

38
परिवार की चिन्ता में मुम्बई से घर पैदल\
  • तेजस्विता उपाध्याय, मऊ (उत्तर प्रदेश)
  • तुझे लम्बा होने का गुमान था ऐ सड़क,लो हम अपने पैरों से तुझे नाप दिये।कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण और लाॅक डाउन के बिच बन्द कम्पनियों से बेरोजगार हुए कोई मजदूर पैदल बम्बई से चल पड़ा तो कोई ट्रक से सवार होकर आपने घर को चल पड़ा किसी ने तो यहाँ तक कहा कि अब परदेश नहीं जायेंगे घर पर ही रहकर परिवार के साथ मिलकर रोजी रोटी का साधन ढुंढेगे ।

परिवार की चिन्ता में मुम्बई से घर पैदल चले आये

तेजस्विता उपाध्याय, मऊ (उत्तर प्रदेश)
तुझे लम्बा होने का गुमान था ऐ सड़क,लो हम अपने पैरों से तुझे नाप दिये।कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण और लाॅक डाउन के बिच बन्द कम्पनियों से बेरोजगार हुए कोई मजदूर पैदल बम्बई से चल पड़ा तो कोई ट्रक से सवार होकर आपने घर को चल पड़ा किसी ने तो यहाँ तक कहा कि अब परदेश नहीं जायेंगे घर पर ही रहकर परिवार के साथ मिलकर रोजी रोटी का साधन ढुंढेगे ।
बम्बई से कुछ दूर पैदल फिर ट्रक से किसी तरह एक हफ्ते में घर पहुँचे गोठा निवासी शकील अहमद ने बताया कि हम तो दोनों तरफ से मारे गये इधर हमारे बच्चे हमारे लिये तड़प रहें थे, उधर हम जिस कम्पनी में काम करते वह कम्पनी बन्द हो गयी कम्पनी मालिक ने हाथ खड़ा कर लिये किसी तरह हम पैदल चलते चलते फिर ट्रकों पर सफर करते हुए गांव पहुंचे है अब हम कब जायेंगे हमे नही पता ।एक हफ्ता कठिन राह पर चलते हुए गोंठा पहुंचे शेषनाथ चौहान ने बताया कि एक कांट्रैक्ट कम्पनी में काम करते थे लेकिन लाॅकडाउन होने से सब कुछ बन्द हो गया खाने खाने को हम मोहताज हो गये किसी तरह से एक लम्बी दूरी तय करते हुए घर पहुँचे तभी गाँववाले बड़े ही हेय दृष्टि से हमे देखने लगे मै स्वयं को अपनी स्वेच्छा से एक स्कुल में आकर रह रहा हूँ ।अहमदाबाद से ट्रेन से बलिया तथा बलिया से पैदल गोंठा गांव पहुंचे देवनाथ चौहान ने बताया कि हमारा कारोबार पुरी तरह से ठप्प हो गया हम अपने परिवार में पहुंचे तभी सबको कोरोना का भय सताने लगा हम किसी तरह से अपने परिवार को छोड़कर एक स्कुल में रह रहे हैं पता नही कबतक हमें यह बनवास काटना पड़ेगा। ये लोग किसी तरह से घर पहुँचे लेकिन घर पहुँचते ही छूआछूत की भावना दिखने लगी तो ये खुद परिवार और दूसरों के भलाई के लीये घर से निकल कर स्वेच्छा से एक गांव के स्कुल में क्वारंटाइन हो गये कोरोना महामारी का दंश झेल रहे आये मजदूरों ने बताया कि ये कितने दिन स्कूल में रहेगे उन्हे खुद नहीं पता। आपको बता दें कि इन लोगों को गावँ के प्रधान द्वारा कोई मदद नहीं मिल रही है इनके जरूरत की सारी चीज़ें जैसे समय समय पर खाना और बरतन वग़ैरह इनके परिवार द्वारा मुहैया कराई जा रही है। अपने परिवार जनों से मिलनें आने वाले लोग पूर्ण रूप से सोशल डिस्टेंसींग को ध्यान में रखकर ही मुलाकात कर रहे हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here