इवांका ने किया हिंदुस्तान की बेटी की तारिफ

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इवांका ने किया हिंदुस्तान की बेटी की तारिफ
  • तेजस्विता उपाध्याय।। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प की बेटी इवंका ट्रंप ने अपने ट्वीटर हैंडल से हाल ही में एक लड़की की खबर शेयर की है जहां वो अपने पिता को साईकल पर शहर से गावं बिठा लायी। इवंका ने इस खबर को शेयर करते हुये भारतीयों को अपने रिश्तों को लेकर संवेदनशीलता की तारीफ़ की है।

इवांका ने किया हिंदुस्तान की बेटी की तारिफ

तेजस्विता उपाध्याय।। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प की बेटी इवंका ट्रंप ने अपने ट्वीटर हैंडल से हाल ही में एक लड़की की खबर शेयर की है जहां वो अपने पिता को साईकल पर शहर से गावं बिठा लायी। इवंका ने इस खबर को शेयर करते हुये भारतीयों को अपने रिश्तों को लेकर संवेदनशीलता की तारीफ़ की है।

लॉकडाउन के चलते प्रवासी मजदूर पैदल ही अपने गांव को रवाना हो रहें है या फिर जो भी साधन उन्हें दिख रहा उसपर बिना संक्रमित होने के डर से सवार हो जा रहें हैं इसी प्रवासी मजदूरों के अपने देशवापसी के रास्तों से ज्योति अपने घायल पिता को साइकिल पर बिठा अपने गंतव्य की ओर रवाना हुई।ज्योति अपने बीमार पिता को साइकिल पर बिठाकर 12 सौ किलोमीटर का सफर तय कर अपने घर पहुंची जो की बिहार के दरभंगा में स्थित है। अपने पिता के प्रति उसका समर्पण और साहस ज्योति को अखबारों के सुर्खियों में बना दीया यही नही बल्कि विदेशों में भी इसके साहस की सरहना की जा रही है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ने ट्विटर पर उनकी प्रशंसका की है। कहा, 15 साल की ज्योति कुमारी साइकिल से अपने घायल पिता को लेकर 1,200 किलोमीटर से अधिक की दूरी सात दिनों में तय कर गांव पहुंच गई। धैर्य और प्रेम के इस खूबसूरत कार्य ने भारतीय लोगों और भारतीय साइकिलिंग महासंघ का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
आपको बता दें कि दरभंगा सिरहुल्ली गांव की रहने वाली 15 साल की ज्योति जनवरी में अपने बीमार पिता की सेवा करने के लिए गुड़गांव गई थी। इसी दौरान मार्च में लॉकडाउन हो गया और वह गुड़गांव में ही फंस गई। बीमार पिता के पास पैसे नहीं थे, इसलिए पिता और बेटी के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया। इसी बीच प्रधानमंत्री राहत कोष से एक हजार रुपये उनके खाते में आए। ज्येाति ने कुछ और पैसे मिलाकर अक पुरानी साइकिल खरीदी और पिता को उस पर बिठाकर गांव तक का सफर तय करने का फैसला कर लिया। पिता ने पहले तो इंकार किया, लेकिन बेटी के हौसेले देखकर उन्होंने अनुमति दे दी। ज्योति आठ दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद 12 सौ किलोमीटर साइकिल चलाकर अपने पिता को लेकर गुड़गांव से दरभंगा के सिरहुल्ली गांव पहुंच गई।

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