लॉकडाउन ने छुड़ाई शराब, परिजनों को मिली राहत

86
टेस्ट कोरोना में सभी 193 लोग पास
टेस्ट कोरोना में सभी 193 लोग पास
  • दोहरीघाट। कोरोना वायरस एवं लॉकडाउन के चलते भले ही लोगों की जिंदगी नीरस हो गई थी। काम-धंधे बन्द होने से मन में नकारात्मक भावनाएं भी आती थी। साथ में संक्रमण का डर तो अभी भी बरकरार हैं। मगर लॉकडाउन ने उन शराबियों की भी शराब छुड़ा दी, जिन्हें डॉक्टरों ने चंद महीनों का मेहमान बता दिया था।

लॉकडाउन ने छुड़ाई शराब, परिजनों को मिली राहत

दोहरीघाट। कोरोना वायरस एवं लॉकडाउन के चलते भले ही लोगों की जिंदगी नीरस हो गई थी। काम-धंधे बन्द होने से मन में नकारात्मक भावनाएं भी आती थी। साथ में संक्रमण का डर तो अभी भी बरकरार हैं। मगर लॉकडाउन ने उन शराबियों की भी शराब छुड़ा दी, जिन्हें डॉक्टरों ने चंद महीनों का मेहमान बता दिया था। बावजूद इसके उन्हें मरना पसंद था, मगर शराब से दूरी नहीं। इस बीच आए कोरोना ने इन मदिराप्रेमियों के होश उड़ा दिए, क्योंकि सरकार ने पूरे दो महीने के लिए शराब बिक्री पर रोक लगा दी थी। अब इसके लिए वे न तो अपने परिजनों को दोष दे सकते थे और न ही पैसे के अभाव को। कुछ दिनों तक तो इन मदिराप्रेमियों के होश फाख्ता रहें, मगर धीरे-धीरे इनकी जिंदगी वापस पटरी पर आने लगी। हाल-ए-बयां यह हैं कि शराब की दुकानें खुलने के बाद भी वे शराब से दो गज की दूरी बना कर रखते हैं। नगर के बल्लीपुरा निवासी मनोज जिन्हें शराब पीने की बहुत बुरी लत थी, लॉकडाउन ने उनकी यह आदत छुड़ा दी। अब ये शराब को हाथ तक नहीं लगाते। यहीं नहीं उन्होंने अपने घर में ही चाय-पकौड़ी की दुकान कर ली हैं। इसी प्रकार घोसी के रमेश जिनके परिजनों ने उनकी लत छुड़ाने के लिए न जाने कितने प्रयास किए। मगर उनकी आदत को छुड़ा नहीं सकें। परंतु इस लॉकडाउन में उन्हें भी एक सभ्य इंसान बना दिया और उन्होंने शराब पीना छोड़ दिया।
इन उदाहरणों से यह कहना भी कुछ हद तक जायज ही प्रतीत होता हैं, कि कोरोना महामारी ने यदि हजारों लोगों की जिंदगी छीनी तो कुछ की जिंदगी को संवारने में भी इसका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।